शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

बटवारा



सन् 1947 के करीब हमारे देश भारत का एक बटवारा हुआ था, मोहन दास करम चंद गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना के वजह से अरब से आये एक विदेशी धर्म के लिए और एक अलग देश पाकिस्तान बनाया गया था मुसलमानो के लिये। जिसका दर्द भारत के मूल निवासी जो हिन्दु समाज है वो आज तक नही भूल पाया है। आज हर राज्य हर जिले मे एक गांधी और जिन्ना पैदा हो गये है जो भारत को टुकड़ो मे बाँट कर उस पर राज करना चाहते है। इनमे से कुछ लोग हमारे देश कि राजनिति मे घुस गये है ।
  ताजा उदाहरण हमारे देश कि ऱाजधानी दिल्ली राज्य के कानून मंत्री सोमनाथ भारती का है।जिस देश कि परम्परा (अतिथि देवो भव-) रही हो वहाँ एक राज्य का कानून मंत्री यूगांडा से आये महिलाओ के साथ अभद्र व्यवहार करता है और उन पर नस्ल भेदी टीप्पणी करता है, तथा साथ ही साथ समाज मे बाटने वाली मानसिकता का संदेश देता है ।
  जिसके परिणाम स्वरूप दिल्ली मे हमारे देश के पूर्वी भाग अरूणाचल प्रदैश से आये छात्र को दिल्ली के निवासीयो ने उसके पहनावे को लेकर नस्ल भेदी  टीप्पणी की और जब उस छात्र ने इस बात का विरोध किया तो उसे वहाँ के लोगो ने बुरी तरह से पिटाई कि जिससे उसकी मौत हो गई ।
  अब इन सब घटनाओ को देखकर मेरे मन मे कुछ सवाल उठते है कि क्या उत्तरपूर्वी राज्यो के लोग भारत के निवासी नही है
? क्या उत्तर पूर्वी राज्यो को भारत से अलग करने कि तैयारी है?क्या दिल्ली कैवल सोमनाथ भारती,मनीषसिसोदिया,और प्रशांतभूषण जैसै देश के गद्दारो के बाप की जागीर है।
  कोई कहता है कि काश्मीर को भारत से अलग कर दो तो कोई नस्लवाद को बढावा देता है ।इसीलिए मैने कहा कि आज हर नगर हर शहर मे कही ना कही गांधी और जिन्ना फिर से पैदा हो गये है जो हमारे देश को कई टुकड़ो मे बाँटना चाहते है।
  आज जरूरत है तो सिर्फ इस बातकि कि जो लोग भारत को सशक्त और समृध देखना चाहते है वो एक जुट होकर राजनिति मे इन जैसे देशद्रोहीयो को आने से रोके क्योकि राजनिति से ही हमारे देश के भविष्य का निर्धारण होता है, और इनके खतरनाक ईरादो से दूरी बना कर रखे चाहै ये लाख प्रलोभन ही क्यूँ न दे।
जयहिन्द
वन्देमातरम्

सोमवार, 27 जनवरी 2014

गंदी राजनिति



  क्या हम हिन्दु इस देश के नागरिक नही है?क्या हमारा इस देश के संसाधन पर कोई अधिकार नही है?क्या हम हिन्दु जनम से ही आतंकवादी होते है? मेरा जबाब है नही।
  अब आप सोच रहे होंगे की ये कैसा सवाल है जिसका जबाब ब्लॉग लिखने वाला खुद ही दे रहा है और ये कैसा पोस्ट का टाइटल है। तो मै आपको बता दुं कि हमारे देश की राजनिति पर मेरा ध्यान तब से है जब से मैने होश संभाला है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को वहाँ कि राजनिति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करतीहै जहाँ का वह निवसी होता है,भले ही वह लाख दावा करे की उसे राजनिति से कोई मतलब नही है।
  (भारत) हमारे देश का नाम महाराज दुष्यन्त और महारानी शकुंतला के वीर और परम प्रतापी पुत्र भरत के नाम पर रखा गया जो एक हिन्दु राजा थे। हम हिन्दु कई युगो से इसी भारत के निवासी रहे है। हमारे देश मे मुसलमान आये लूटेरा बनकर और उन्होने इस देश मे खुब लूटपाट मचाया और यहा के शाशक बन बैठे । उसके बाद 16वी शताब्दी के करीब हमारे देश मे अंग्रेज आये,उन्होने भी हमारे देश को खूब लूटा और हमारे देश पर शाशन किया। अंग्रेज हमारे देश मे लूटपाट और शाशन तो किया ही साथ ही साथ अपने देश का धर्म (ईसाई धर्म) भी लाकर हम पर थोप दिया तथा हमारी सभ्यता और संस्कृति, खुब नुकसान पहुँचाया ।
  और फिर 1947 मे हमारा देश अजाद हुआ अंग्रजो कि दासता से और जब देश मे शासन के लिये मुखिया चुनने की बात आई तो मुसलमानो ने कहा कि हम हिन्दुओ को शासक के रूप मे नही स्वीकार कर सकते इसलिये हमे अलग देश चाहीए,और अंग्रेजो की शिक्षा पद्धति के गुलाम मोहन दास करमचंद गांधी के ईशारे पर अरब के मुसलमानो के लिये भारत के टुकड़े कर के एक अलग देश बनाया गया पाकिस्तान । जब धर्म के नाम पर देश का बटवारा हो गया और मुसलमानो को जब पाकिस्तान जाने की बारी आई तब फिर गांधी ने अपनी गंदी राजनिति और अपने मुस्लिम प्रेम को जाहीर करते हुये ये सार्वजनिक बयान दिया-  (जिस मुस्लिम को पाकिस्तान जना है वो पाकिस्तान चले जाये और जिनको भारत मे रहना वो भारत मे ही रहे)।
  इसी तरह से जब नेहरू और सरदार पटेल मे प्रधानमंत्री बनने के लिये चुनने के बात आई तो गांधी ने हिन्दुओ के समर्थक रहे सरदार पटेल को दरकिनार कर मुस्लिमो के समर्थक रहे नेहरू को चुना। आज आजादी के 66-67 साल के बाद भी हम इस देश के दोयम दर्जे के नागरिको मे गिने जाते है हमारे देश का प्रधान मंत्री जिसे हमने चुन कर भेजा कि वो सभी को समान भाव से देखते हुये शासन करेगा वो अपनी मानसिक दिवालियेपन का परिचय देते हुये कहता है की देश के संसाधनो पर पहला हक मुसलमानो का होगा, मै पुछता हूँ क्यो?हम हिन्दु संसाधनो पर पहला हक मांगने किस देश मे जाये।ये तो नही बताते हमारे प्रधानमंत्री।
  इसी तरह हमारे देश का गृहमंत्री हम हिन्दुओ को आतकवादी बताता है।मै कहता हूँ कि अगर हम आतंकवादी होते तो आज हमारे देश मे एक भी मुसलमान न होता और न ही तुम जैसा देशद्रही हमारे देश का गृहमत्री होताऔर नही कोई गृहमंत्री ये कहता कि किसी भी मुस्लिम अपराधि को तंग न किया जाये।
 आज सरकार और हमारे चुने हुए प्रतिनिधि के उपेक्षा तथा गंदी राजनिति के कारण ही मेरे और मेरे जैसे हजारो लाखो भारतवासीयो के मन मे अशुरक्षा की भावना घर कर गई है और लगने लगा है कि मुझे भी अपने तथा अपने धर्म की रक्षा के लिये आतंकवादी बन कर इन आसुरी शक्तियो,देश द्रहियो का नाश करना चाहीये।
  गीता मे भगवान श्री कृष्ण ने कहा ही है अहींसा परम धर्म है किन्तु धर्म की रक्षा के लिये शस्त्र उठाना उससे भी बड़ा धर्म है।

जय श्री राम

शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

दुविधा



  ब्लॉग लिखना मेरा शौक नही है,पर क्या करू हमारे देश मे हो रही राजनितिक उठा पटक, सरकार द्वारा लिये गये गलत निर्णय और कुछ हद तक मेरी बेरोजगारी भी जिम्मेदार है ।
 अब आप सोचेंगे की राजनितिक उठ पटक का ब्लॉग लिखने से क्या संबंध?तो मै बता दूँ कि पिछले दिनो हमारे देश की राजनिति मे एक नये सितारे का जन्म हुआ,नाम अरविन्द केजरीवाल इनका जन्म मुख्य रूप से कांग्रेस विरोध और भ्रष्टार को खत्म करने और एक नये तरह की राजनैतिक विकल्प के रूप मे हुआ। जिसको लेकर हमारे देश के तमाम न्यूज चैनल ओर मिडिया प्रतिष्ठानो ने खूब हो हल्ला मचाया। कुछ राजनितिज्ञो ने इन्हे कांग्रेस की बी टीम तक बोला ।                            
  इनकी पार्टी को भारतीय राजनिति मे आये ज्यादा दिन भी नही हुये थे कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव की घोषणा हुई और इनकी पार्टी ने चुनाव लड़ने का फैसला लिया और 28 सिटो पर अच्छा प्रदर्शन करते हुये जीत भी हासिल किया,भाजपा ने 32और कांग्रेस सिर्फ 8 सिटो पर सिमट कर रह गई।जब सरकार बनाने की बात आई तब इनका कांग्रेस विरोध बदलकर भाजपा विरोध हो गया जैसे की भाजपा की ही केन्द्र मे सरकार रही हो और सबसे भ्रष्ट भाजपा ही हो इससे उन रजनितिज्ञो की बात सच साबित हो गई की ये कांग्रेस की बी टीम है और इस तरह से इन्होने 15 से 20 दिनो तक पूरे दिल्ली मे राजनितिक अस्थिरता का माहौल बनाया और फिर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाया। सरकार बनने के बाद जब इनको दिल्ली की जनता से किये गये वादो को पूरा करना चाहिये था तब ये अपने कैबिनेट के मंत्रियो को लेकर सड़क पर धरना देने बैठ गये उस जगह पर जहां धारा 144 लगी हुई थी और जहाँ से हमारे गणतंत्र के पर्व की तैयारीयाँ होनी थी और जब इनसे पूछा गया तो इन्होने देशद्रोही की तरह बयान देते हुये बोला कैसा 26जनवरी?कैसा गणतंत्र ।
  अब जबसे लोकसभा चुनाव की घोषणा हुई है तब से ये लोकसभा चुनाव की तैयारी मे लग गये है जिसके कारण दिल्ली मे दिल्ली की जनता के हित के लिये जो भी प्रशासनिक काम होने चाहिए थे वो ठप्प पड़ गये जिससे दिल्ली की जनता ठगी सी महसूस कर रही है ।
  कभी ये दिल्ली के मुख्यमंत्री होकर खुद कानून तोड़ते है,तो कभी ये और इनकी पार्टी के लोग देशद्रोहीयो की तरह बयान देते है।और तो और ये लोकसभा चुनाव की तैयरी भी कर रहे है जिससे की पूरे देश मे फिर से राजनितिक अस्थिरता फैला सके ।
  एक तो वर्तमान सरकार अपने गलत आर्थिक नितियो से पुरे देश मे बेरोजगारी का माहौल बना चुकी है दूसरी तरफ गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर होते जा रहे है।
  अब मै खुद दुविधा मे हूँ कि आने वाले लोकसभा चुनाव मे किस को वोट दु या जिसको वोट दे रहा हूँ वो अरविन्द केजरीवाल की तरह गिरगिट और देशद्रोही निकला तो? कौन मुझ जैसे बेरोजगारो के लिए नये रोजगार के अवसर सृजन कर पायेगा

गुरुवार, 23 जनवरी 2014

बदलती सोच बदलते हम




आज कल हमारे देश मे एक शब्द बहुत चलन मे है बलत्कार(RAPE)। ये शब्द चाहे किसी भी रूप मे हो लेकिन इस शब्द से हमारे देश की विश्व मे बहुत ही बदनामी होती है।इन सब चिजो को देख कर मन मे बहुत ही पीड़ा होती है
इस शब्द या घटना के दो पक्ष होते है,एक स्त्री और एक पुरूष,एक पिड़ित और एक अपराधी।चूकि हमारा समाज पुरूष प्रधान है इसलिए कभी भी या कही भी इस तरह कि घटना होने पर पुरूष  ही जिम्मेदार होता है, और होना भी चाहीये,क्योकि हमारा समाज पुरूष प्रधान है।
हमारे समाज मे वैदिक काल मे जब ये पुरूष प्रधान व्यवस्था बनाई गई थी तब दोनो के लिये कुछ मर्यादा निश्चित किया गया था जिससे इस तरह की घटनाओ पर कुछ हद तक अंकुश लगा था,पर आज कल इन घटनाओ को देखकर मन मे कुछ सवाल उठते है,कि क्या आज के समय मे स्त्री और परूष दोनो अपने मर्यादा मे है,क्या इन सब घटनाओ के लिए केवल और केवल पुरूष ही जिम्मेदार है,क्या समाज की कोई जिम्मेदारी नही बनती,क्या उन लड़को के मॉ बाप की कोई जिम्मेदारी नही होती जो आपराधी होते है या उन लड़कियो के मॉ बाप की कोई जिम्मेदारी नही होती जो पिड़िता होती है।
मेरा मानना है कि अपराधी और पिड़ता से पहले हम सब की जिम्मेदारी बनती है,पूरे समाज की जिम्मेदारी बनती है।आज हम विकास और सभ्यता के नाम पर जिस तरह से पश्चिमी देशो का अंधानुकरण करते जा रहे है इसी का परिणाम है, इस तरह कि घटनाए। हमारे समाज का निर्माण पश्चिम को ध्यान मे रख कर नही किया गया था ।
हमे अपने बच्चो को उनकी मर्यादा का बोध करवाना होगा। लड़कियो को ये बताना होगा कि उनको भारतीय समाज मे रहना है न कि पश्चिमी समाज मे,उस समाज मे जहॉ सूरत से ज्यादा सिरत को महत्व दिया जाता है
और लड़को को ये बताना होगा की स्त्रीया उपभोग की वस्तु नही होती है जैसा कि पश्चिमी समाज मे समझा जाता है बल्की हमारे समाज मे स्त्री किसी की मॉ है तो किसी की बहन है वह हमेशा भारतीय समाज मे आदर योग्य होती है,और हमारे आस पास टी वी चैनलो के माध्यम से तथा अन्य माध्यमो जो गंदगी तथा अश्लिलता परोसी जाती है उसका पुरजोर विरोध करना होगा,तभी हम इस बलत्कार नाम के कलंक से मुक्त हो पायेंगे नही तो हम हमेशा इन घटनाओ की जिम्मेदारी किसी पुरूष पर डल कर छाती पिटते रह जायेंगे

शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

ये कैसा देश ये कैसै लोग

ये कैसा देश ये कैसै लोग
आज अपने देश मे ही दो तरह के देश उत्तपन्न हो गये है।एक भारत और एक इंडिया,आप सोचेंगे की ये कैसा बात कर रहा है।.....तो मै पहले आपको भारत और इंडिया मे अंतर बता दू।..पहले मै भारत के बारे मे बताऊ तो भारत वह देश है जहाँ वो लोग रहते है जो अन्न उगाता है जैसे किसान, मजदूर,ठेलेवाले और तमाम वो लोग जो अपनी दो वक्त कि रोटी के लिये अपना दिन रात एक कर देते है,यहाँ तक कि अपनी जान की बाजी तक लगाने से नही चूकते है।ये लोग अपनी कई अवश्यकताओ की पूर्ति के लिये सरकार पर निर्भर होते है,जैसे-शिक्षा,स्वास्थय आदि
अब बात करते है इंडिया कि इसमे वो लोग रहते है जो तमाम तरह कि सुविधाओ ,का उपभोग करते है। इनमे से कई सुविधाये तो सरकार द्वारा प्रदान कि जाती है तो कुछ सुविधाओ का निर्माण ये खुद करते है,जैसे- अच्छी सड़के, अच्छे स्कूल,बड़ी-बड़ी बिल्डींगे आदी।
इनको अपनी आजिविका के लिये ज्यादा सोचना नही पड़ता है क्योकि इनको उपर वाले से जरूरत से ज्यादा मिला होता है ।
..अब आते है मूल बात पर कि एक ही देश मे दो तरह के देश क्यूँ,तो ऐसा इस लिये कि जो लोग इंडिया मे रहते है उनमे से 95प्रतिशत लोग  तमाम तरह कि सुविधाओ पर अपना एक क्षत्र अधिकार समझते है,और अगर अगर इन सुविधाओ मे से भारत मे रहने वाले लोगो को कुछ सुविधा मिल जाती है तो इंडिया मे रहने वाले लोग अपने अधिकारो पर लगता है कि कोई डाका डाला जा रहा है।पर ये सिक्के दूसरे पहलू को भूल जाते है कि यही भारत के लोग तमाम तरह कि सुवधा को बनाने के लिये  अपनी जान की बाजी तक लगा देते है और बदले मे उन्हे क्या मिलता है बस दो वक्त की रोटि ।
और इन्ही सब बातो को देख कर मन विचलित हो जाता है एक तरफ तो एक बच्चे का स्कूल कि एक महिने की फिस 5से 7 हजार रूपये है और वही दूसरी तरफ दूसरे बच्चे के पूरे परिवार का एक महिने का खर्च 5 हजार है।  
 अब आप ही बताये कि ये कैसा देश और कैसे लोग नही है तो क्या है।
 भारत V/S India
=========

भारत में गांव है, गली है, चौबारा है।
इंडिया में सिटी है, माल है, पंचतारा है।

भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है।
इंडिया में फ्लैट और मकान है।

भारत में काका है, बाबा है, दादा है, दादी है।
इंडिया में अंकल आंटी की आबादी है।

भारत में खजूर है, जामुन है, आम है।
इंडिया में मैगी, पिज़्ज़ा, माजा का नकली आम है।

भारत में मटके है, दोने है, पत्तल है।
इंडिया में पोलीथीन, वाटर व वाइन की बोतल है।

भारत में गाय है, गोबर है, कंडे है।
इंडिया में सेहत नाशी चिकन बिरयानी व अन्डे है।

भारत में दूध है, दही है, लस्सी है।
इंडिया में खतरनाक विस्की, कोक व पेप्सी है।

भारत में रसोई है, आंगन है, तुलसी है।
इंडिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है।

भारत में कथड़ी है, खटिया है, खर्राटे है।
इंडिया में बेड है, डनलप है और करवटें है।

भारत में मंदिर है, मंडप है, पंडाल है।
इंडिया में पब है, डिस्को है,हॉल है।

भारत में गीत है, संगीत है, रिदम है।
इंडिया में डांस है, पॉप है, आइटम है।