सोमवार, 27 जनवरी 2014

गंदी राजनिति



  क्या हम हिन्दु इस देश के नागरिक नही है?क्या हमारा इस देश के संसाधन पर कोई अधिकार नही है?क्या हम हिन्दु जनम से ही आतंकवादी होते है? मेरा जबाब है नही।
  अब आप सोच रहे होंगे की ये कैसा सवाल है जिसका जबाब ब्लॉग लिखने वाला खुद ही दे रहा है और ये कैसा पोस्ट का टाइटल है। तो मै आपको बता दुं कि हमारे देश की राजनिति पर मेरा ध्यान तब से है जब से मैने होश संभाला है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को वहाँ कि राजनिति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करतीहै जहाँ का वह निवसी होता है,भले ही वह लाख दावा करे की उसे राजनिति से कोई मतलब नही है।
  (भारत) हमारे देश का नाम महाराज दुष्यन्त और महारानी शकुंतला के वीर और परम प्रतापी पुत्र भरत के नाम पर रखा गया जो एक हिन्दु राजा थे। हम हिन्दु कई युगो से इसी भारत के निवासी रहे है। हमारे देश मे मुसलमान आये लूटेरा बनकर और उन्होने इस देश मे खुब लूटपाट मचाया और यहा के शाशक बन बैठे । उसके बाद 16वी शताब्दी के करीब हमारे देश मे अंग्रेज आये,उन्होने भी हमारे देश को खूब लूटा और हमारे देश पर शाशन किया। अंग्रेज हमारे देश मे लूटपाट और शाशन तो किया ही साथ ही साथ अपने देश का धर्म (ईसाई धर्म) भी लाकर हम पर थोप दिया तथा हमारी सभ्यता और संस्कृति, खुब नुकसान पहुँचाया ।
  और फिर 1947 मे हमारा देश अजाद हुआ अंग्रजो कि दासता से और जब देश मे शासन के लिये मुखिया चुनने की बात आई तो मुसलमानो ने कहा कि हम हिन्दुओ को शासक के रूप मे नही स्वीकार कर सकते इसलिये हमे अलग देश चाहीए,और अंग्रेजो की शिक्षा पद्धति के गुलाम मोहन दास करमचंद गांधी के ईशारे पर अरब के मुसलमानो के लिये भारत के टुकड़े कर के एक अलग देश बनाया गया पाकिस्तान । जब धर्म के नाम पर देश का बटवारा हो गया और मुसलमानो को जब पाकिस्तान जाने की बारी आई तब फिर गांधी ने अपनी गंदी राजनिति और अपने मुस्लिम प्रेम को जाहीर करते हुये ये सार्वजनिक बयान दिया-  (जिस मुस्लिम को पाकिस्तान जना है वो पाकिस्तान चले जाये और जिनको भारत मे रहना वो भारत मे ही रहे)।
  इसी तरह से जब नेहरू और सरदार पटेल मे प्रधानमंत्री बनने के लिये चुनने के बात आई तो गांधी ने हिन्दुओ के समर्थक रहे सरदार पटेल को दरकिनार कर मुस्लिमो के समर्थक रहे नेहरू को चुना। आज आजादी के 66-67 साल के बाद भी हम इस देश के दोयम दर्जे के नागरिको मे गिने जाते है हमारे देश का प्रधान मंत्री जिसे हमने चुन कर भेजा कि वो सभी को समान भाव से देखते हुये शासन करेगा वो अपनी मानसिक दिवालियेपन का परिचय देते हुये कहता है की देश के संसाधनो पर पहला हक मुसलमानो का होगा, मै पुछता हूँ क्यो?हम हिन्दु संसाधनो पर पहला हक मांगने किस देश मे जाये।ये तो नही बताते हमारे प्रधानमंत्री।
  इसी तरह हमारे देश का गृहमंत्री हम हिन्दुओ को आतकवादी बताता है।मै कहता हूँ कि अगर हम आतंकवादी होते तो आज हमारे देश मे एक भी मुसलमान न होता और न ही तुम जैसा देशद्रही हमारे देश का गृहमत्री होताऔर नही कोई गृहमंत्री ये कहता कि किसी भी मुस्लिम अपराधि को तंग न किया जाये।
 आज सरकार और हमारे चुने हुए प्रतिनिधि के उपेक्षा तथा गंदी राजनिति के कारण ही मेरे और मेरे जैसे हजारो लाखो भारतवासीयो के मन मे अशुरक्षा की भावना घर कर गई है और लगने लगा है कि मुझे भी अपने तथा अपने धर्म की रक्षा के लिये आतंकवादी बन कर इन आसुरी शक्तियो,देश द्रहियो का नाश करना चाहीये।
  गीता मे भगवान श्री कृष्ण ने कहा ही है अहींसा परम धर्म है किन्तु धर्म की रक्षा के लिये शस्त्र उठाना उससे भी बड़ा धर्म है।

जय श्री राम

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